आज कल भारत के मीडिया के एक हिस्से में लगातार चीन विरोधी खबरे प्रसारित और प्रकाशित हो रही है। इन खबरों के अनुसार चीन लगातार सीमा का उलंघन कर रहा है। जबकि हमारे देश के प्रधानमंत्री तक ने इन खबरों का खंडन किया है। सवाल यह है की जब देश का नेत्रत्व यह स्वीकार कर रहा है की कोई सीमा उल्लंघन का मामला नही है, तो वो कौन है जो इस तरह की खबरों को हवा दे रहा है या मीडिया के जरिये ये माहोल तैयार किया जा रहा है की हमें चीन से बहुत गंभीर खतरा है। जहाँ भारतीय मीडिया इस तरह की गर्म खबरे परोस रहा है वही चीनी मीडिया खामोस है।
मामले की पड़ताल करते समय हमें यह भी ध्यान रखना होगा की इसी तरह वाक युद्घ चलता है और मामला गरमा जाता है तो उस इस्थिति में फायदा किसका होगा। जाहिर है की भारत या चीन का तो फायदा इसमे होना नही है। क्योकि युद्घ होने की दशा में दोनों देशो का नुकसान होना तय है, इसलिए दोनों देशो का नेत्रत्व लगातार शान्ति बनाये हुए है। तो सवाल उठता है की युद्घ होने में फायदा किसका है, तो हमें बिना दिमाग पर जोर डाले पता चल जाएगा की इसमे फायदा अमरीका को होगा। क्योकि अमरीका में लगातार मंदी का माहोल है, उसकी खेती उसके हथियार है, अतः वो अपने हथिया भारत को बेचना चाहता है, लेकिन भारत हथियार क्यो खरीदेगा, इसलिए युद्घ जरूरी है, इसलिए अमरीका लगातार भारत चीन विरोधी ख़बरों को हवा दे रहा है और हमारे कुछ मीडिया के साथी अनजाने में उसके हथियार बने हुए हैं।
