लखनऊ स्थित के के नर्सिंग होम के संचालक डॉ के के सिंह व् उनके अन्य भाइयो के साथ ही उनके पिता डॉ के ऍम सिंह पर वही की एक छात्रा सत्यभामा सिंह उर्फ़ अंजली सिंह ने यौन उत्पीरण का आरोप लगाया है। उसके अनुसार वहां के पी आर ओ राम जी बाजपाई के द्वारा ही उक्त लोगो द्वारा उसके सामने यह प्रस्ताव रखा गया। जब उसने इस प्रस्ताव को मानने से मना कर दिया तो उसका एक्जाम जो अगस्त २००८ में होना था उसे नही देने दिया गया। इस बात का जब छात्रा द्वारा वहां की कार्यकारी संचालक अनीता सिंह को बताया गया तो उन्होंने भी उसे वहां से भगा दिया और हाजिरी कम होने से एक्जाम रोकने की बात कही। जबकि इसके मूल में कारन वही था जो सत्यभामा बता रही थी। इस बीच राम जी बाजपाई सत्यभामा के कमरे पर लड़किया लेकर आने लगा। सत्यभामा ने इसका भी विरोध किया और कोलेज प्रबंधन से इसकी सिकायत की लेकिन किसी ने उसकी बात पर यकीन नही किया और सबूत मांगे। मजबूर होकर छात्रा ने अपने किसी परिचित का कैमरा मांग कर रामजी की करतूतों की रिकार्डिंग की और और अनीता सिंह, के एम् सिंह के के सिंह व् अन्य लोगोको को दी किंतु उन लोगो ने रामजी या किसी अन्य के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय उसी को ग़लत साबित करने लगे । मजबूरी में उसने मीडिया व अन्य महिला संगठनों से सम्पर्क किया है। अब जांच हो रही है लेकिन आज के अखबारों के अनुसार रामजी बाजपाई के अलावा सभी को क्लीनचिट मिल गई है और रामजी फरार है।
विदित हो की के के सिंह पहले भी कई प्रकार के विवादों में सामिल रहे है किंतु अपनी उऊंची पहुँच और पैसे के दम पर वो हर बार बाइज्जत रिहा होते रहे है। इस बार भी वही हो रहा है। जाँच रामजी बाजपाई पर आकर रूक गई है जो की अभी फरार है।'
जाहिर है की पूंजीवादी समाज में हर कम पूजी यानि पैसे से सम्भव है। ऐसे समय में न्याय का गला भी पैसे से घोंटना सम्भव है। किंतु हमें २००४ का आशियाना बलात्कार कांड भी नही भूलना चाहिए जिसमे पाँच रईसजादों ने एक मासूम १३ वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार किया और उसके जिस्म को सिगरेट से दगा था। वो लड़की एक बहुत ही गरीब परिवार से थी। और उसने लडाई लड़ने की ठानी जबकि विरोध में थी तत्कालिन सपा सरकार और राज्य महिला आयूग। ......पर आज, ......पाँच में से चार लोगो को सजा हो चुकी है और पाँचवे का केस ट्रायल पर है।
हमें इन बच्चियों से कुछ सीख लेनी होगी जो आज समाज के उन ठेकेदारों से लोहा ले रही है जिनके पास सत्ता है, पर अफ़सोस हम सब खामोश है। जबकि यह लडाई सिर्फ़ उनकी अपनी लडाई नही है, यह लडाई उन सब बच्चियों की लडाई है जो इन वहशियों के चंगुल में फंस चुकी है या आने वाले समय में फंस सकती है।
Monday, October 12, 2009
Wednesday, September 30, 2009
कल के अख़बार में एक खबर पढ़कर मुझे झटका लगा। यह ख़बर एक बच्ची के बारेमें थी । गरीब अभिभओव्को ने यह सोचकर अपनी बच्ची शिवदेवी को गोमतीनगर के विकास खंड में रहने वाले राजीव वर्मा और रेखा वर्मा को सौप दिया था की उनके पास रहकर शिवदेवी भी कुछ पढ़ लिख जायेगी। लेकिन यह दम्पति तो इन्सान की जगह हैवान निकले। उस बच्ची से एक वयस्क के बराबर कम लेने लगे और कम पुरा न होने पर उस पर मार पड़ती थी। इस्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कीइन हैवानो ने उस बच्ची के गुप्तांगो को भी नुकसान पहुचाया।
बच्ची की माँ कई बार सम्बंधित थाणे फरियाद लेकर गई किंतु भ्रष्ट पुलिस वालो ने उसकी नही सुनी। यदि पुलिस पहले ही बच्ची की माँ की बात पर भरोसा करती तो सायद बच्ची को इतनी तकलीफ न उठानी पड़ती।
सवाल यह है की सरकारों द्वारा बच्चो के लिए तमाम योजनाये चलायी जाती है तो फ़िर यह बच्चे मजदूरी करने को क्यों मजबूर है ? यह बच्चे अपनी पढ़ाई क्यों नही कर पाती? यह पढ़ाई की उम्र में कम क्यों करते है ?
जवाब बहुत सीधा है की जब तक इन बच्चो के माता पिता की आय नही बढती तब तक इस समस्या से छुटकारा नही पाया जा सकता।
बच्ची की माँ कई बार सम्बंधित थाणे फरियाद लेकर गई किंतु भ्रष्ट पुलिस वालो ने उसकी नही सुनी। यदि पुलिस पहले ही बच्ची की माँ की बात पर भरोसा करती तो सायद बच्ची को इतनी तकलीफ न उठानी पड़ती।
सवाल यह है की सरकारों द्वारा बच्चो के लिए तमाम योजनाये चलायी जाती है तो फ़िर यह बच्चे मजदूरी करने को क्यों मजबूर है ? यह बच्चे अपनी पढ़ाई क्यों नही कर पाती? यह पढ़ाई की उम्र में कम क्यों करते है ?
जवाब बहुत सीधा है की जब तक इन बच्चो के माता पिता की आय नही बढती तब तक इस समस्या से छुटकारा नही पाया जा सकता।
ज्यादातर हिस्सों में प्रेम विवाह अब भी अपराध माना जाता है जबकि वैज्ञानिक इस बात का सबूत दे चुके है की यदि पुरूष / लड़का दूसरी जाती का तथा महिला / लड़की दूसरी जाती की हो तो उसकी होने वाली संतान सामान्य बच्चो के मुकाबले ज्यादा तेज होंगे । सवाल यह उठता है की अनपढ़ लोग प्रेम विवाह का विरोध करे तो ठीक है किंतु पढ़े लिखे लोगो द्वारा इस तरह विरोध करना समझ में नही आता है। यह लोग पैंट पहन सकते है, शंकर फसले उगा और खा सकते है लेकिन अपने बच्चो को प्रेम विवाह की छूट नही दे सकते।
अब समय बदल रहा है, अब हर छेत्र में युआ आगे निकल रहे है तो युआओ को आगे बढ़कर यह जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्हें पुराणी रुर्हियो को तोड़ना होगा । उन्हें आगे बढ़कर समाज के उन ठेकेदारो से मुकाबला करना होगा जो प्रेम विवाह को अपराध मानते है.
अब समय बदल रहा है, अब हर छेत्र में युआ आगे निकल रहे है तो युआओ को आगे बढ़कर यह जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्हें पुराणी रुर्हियो को तोड़ना होगा । उन्हें आगे बढ़कर समाज के उन ठेकेदारो से मुकाबला करना होगा जो प्रेम विवाह को अपराध मानते है.
मेरा गाँव
दोस्तों रायबरेली जिले में मेरा गाव है मै वही का रहने वाला हूँ मै भी पहले सोचता था की अमीर गरीब भगवान ने बनाया है लेकिन उम्र के साथ विचार भी परिपक्व होते है और जब आप ऐसे लोगो के बीच हो जो यह बताते हो कि अमीर गरीब भगवान ने नही बल्कि इन्सान ने बनाया है तो निश्चित ही आपके विचारो में भी बदलाव आएएगा
दोस्तों आज ब्लोगिंग का मेरा पहला दिन है, काफी कुछ अभी और सीखना है, बाकि फिर कभी।
आपका अरुण सिंह
दोस्तों आज ब्लोगिंग का मेरा पहला दिन है, काफी कुछ अभी और सीखना है, बाकि फिर कभी।
आपका अरुण सिंह
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