ज्यादातर हिस्सों में प्रेम विवाह अब भी अपराध माना जाता है जबकि वैज्ञानिक इस बात का सबूत दे चुके है की यदि पुरूष / लड़का दूसरी जाती का तथा महिला / लड़की दूसरी जाती की हो तो उसकी होने वाली संतान सामान्य बच्चो के मुकाबले ज्यादा तेज होंगे । सवाल यह उठता है की अनपढ़ लोग प्रेम विवाह का विरोध करे तो ठीक है किंतु पढ़े लिखे लोगो द्वारा इस तरह विरोध करना समझ में नही आता है। यह लोग पैंट पहन सकते है, शंकर फसले उगा और खा सकते है लेकिन अपने बच्चो को प्रेम विवाह की छूट नही दे सकते।
अब समय बदल रहा है, अब हर छेत्र में युआ आगे निकल रहे है तो युआओ को आगे बढ़कर यह जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्हें पुराणी रुर्हियो को तोड़ना होगा । उन्हें आगे बढ़कर समाज के उन ठेकेदारो से मुकाबला करना होगा जो प्रेम विवाह को अपराध मानते है.
Wednesday, September 30, 2009
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