नया वर्ष शुरू हो चूका है। कैसा होगा यह वर्ष इसका आगाज जनवरी माह से ही दिखना शुरू हो गया है। महंगाई सुरसा के मुह की तरह मुह की तरह बढती ही जा रही है। चीनी पचास रूपये किलो हो गयी है, दालें पहले ही १०० रूपये किलो बिक रही थीं । कोढ़ में खाज की इस्थिति तो यह है की सरकारे महंगाई रोकने के कोई उपाय न करके महंगाई के और बढ़ने की आशंका जाता रही है। आम जनता का जीवन बाद से बदतर हो रहा है किन्तु सरकारों को इससे कोई सरोकार नहीं है।
जब भारत आज़ाद हुआ था तब लोगों के मन में बड़ी उम्मीदें थीं। लोगों को लगा की अब हम आजाद हो गए पर ये नहीं मालूम था की जिस कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई थी वही आगे चलकर जनता को लूटने का कम करेगी और देश को फिर से गुलामी के दौर में ले जायेगी, किन्तु कटु सत्य यही है की कांग्रेस आज यही कर रही है। उसको भारत की नहीं इंडिया की फिक्र है । वो देश की बहुसंख्यक आबादी को नहीं बल्कि चंद पूंजीपतियों को ध्यान में रखकर योजनाये बना रही है ।
